केन्द्र ने क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 2.5 प्रतिशत की

 September, 12 2021 3:53 AM Center reduced the standard rate of duty on crude palm oil crude soybean oil and crude sunflower oil to 2.5 percent

उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के क्रम में भारत सरकार ने अधिसूचना संख्या 42/2021 सीमा शुल्क, दिनांक 10 सितंबर 2021 के माध्यम से एक बार फिर से क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर कम कर दी गई है और (i) क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर 11.09.2021 से 2.5 प्रतिशत और (ii) रिफाइंड पाम ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल पर 11.09.2021 से शुल्क की स्टैंडर्ड दर 32.5 प्रतिशत प्रभावी होगी।

केन्द्र ने क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 2.5 प्रतिशत की

उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के क्रम में भारत सरकार ने अधिसूचना संख्या 42/2021 सीमा शुल्क, दिनांक 10 सितंबर 2021 के माध्यम से एक बार फिर से क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर कम कर दी गई है और (i) क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर 11.09.2021 से 2.5 प्रतिशत और (ii) रिफाइंड पाम ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल पर 11.09.2021 से शुल्क की स्टैंडर्ड दर 32.5 प्रतिशत प्रभावी होगी।

इसी अधिसूचना में क्रूड पाम ऑयल पर कृषि- उपकर 17.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।

सरकार ने अधिसूचना संख्या 43/2021- सीमा शुल्क, तारीख 10 सितंबर 2021 के माध्यम से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, तारीख 29 जून, 2021 को रद्द हो गई है, जिसके तहत इसको रद्द करने से पहले किए गए या छोड़े गए कार्यों के अलावा यानी नवीनतम आयात शुल्क (11.09.2021 से प्रभावी) अगले आदेश तक लागू रहेगा।

उल्लेखनीय है कि खाद्य तेलों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें और इस क्रम में घरेलू कीमतें 2021-22 के दौरान लगातार बढ़ रही है, जो महंगाई के साथ ही उपभोक्ताओं के नजरिये से बड़ी चिंता की वजह है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क उन प्रमुख वजहों में से एक है, जिनसे खाद्य तेलों की आवक की लागत और फिर घरेलू कीमतें प्रभावित होती हैं।

इनकी कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के क्रम में, भारत सरकार ने फरवरी, 2021 और अगस्त, 2021 के बीच कई कदम उठाए थे। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

1) आयात शुल्क में बदलाव

सरकार ने अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, तारीख 29 जून, 2021 के माध्यम से 30.06.2021 से क्रूड पाम ऑयल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 10 प्रतिशत कर दी थी और यह 30 सितंबर, 2021 तक प्रभावी रहेगी।

 

2) सरकार ने डीजीएफटी अधिसूचना संख्या 10/2015-2020, तारीख 30 जून, 2021 के माध्यम से रिफाइंड पाम ऑयल की आयात नीति को संशोधित करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से और 31.12.2021 तक की अवधि के लिए “प्रतिबंधित” से “मुक्त” कर दिया था।

इसके साथ ही, रिफाइंड पाम तेलों को केरल में किसी भी बंदरगाह से अनुमति नहीं दी गई है।

 

3) सरकार ने अधिसूचना संख्या 40/2021- सीमा शुल्क, 19 अगस्त, 2021 के माध्यम से क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 7.5 प्रतिशत और रिफाइंड सोयाबीन तेल व सनफ्लॉवर तेल पर 37.5 प्रतिशत कर दी, जो 20.08.2021 से प्रभावी हो गई थी। ऐसा वित्त मंत्रालय में भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, तारीख 29 जून, 2021 में संशोधन के माध्यम से किया गया है।

4) सीमा शुल्क, एफएसएसएआई, पीपीएंडक्यू, डीएफपीडी और डीओसीए के द्वारा विभिन्न बंदरगाहों पर सुविधाएं।

5) कोविड-19 के आलोक में आयातित खाद्य तेलों की विलंबित खेप की निकासी में तेजी लाने के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले और सीमा शुल्क विभाग शामिल हैं जो साप्ताहिक आधार पर आयातित खाद्य तेलों की खेप की समीक्षा करते हैं और सचिव (खाद्य) की अध्यक्षता वाली कृषि कमोडिटीज पर बनी अंतर मंत्रालयी समिति को अवगत कराते हैं।

खाद्य तेलों की आयातित खेपों को तेज मंजूरी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। खाद्य तेलों के मामले में खेप की मंजूरी के लिए औसतन प्रवास समय घटकर 3.4 दिन रह गया है।

हालिया अधिसूचना के बाद पिछली और वर्तमान आयात शुल्कों की तालिका नीचे दी गई है।

 

 

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शुल्क में कटौतियों से पहले ही एक साल में राजस्व पर अनुमानित 3,500 करोड़ रुपये का असर पड़ गया है। आयात शुल्क में वर्तमान/ ताजा कटौती से पूरे साल में 1,100 करोड़ रुपये का असर पड़ने का अनुमान है, इस प्रकार सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को दिया गया कुल प्रत्यक्ष लाभ 4,600 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

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73 शहरों में स्वच्छता के मानकों पर शहरों को श्रेणीबद्ध करने के उद्देश्य से एमओएचयूए द्वारा 2016 में शुरू किया गया, स्वच्छ सर्वेक्षण 4,000 यूएलबी को शामिल करते हुए आज दुनिया का सबसे बड़े शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण बन गया है। सर्वेक्षण की रूपरेखा कई साल के दौरान विकसित हुई है और आज यह एक विशेष प्रबंधन टूल बन गया है, जो स्वच्छता परिणामों को प्राप्त करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को गति देता है। वास्तविकता यह है कि एसएस 2021 का पिछला संस्करण महामारी के चलते जमीनी स्तर पर पैदा चुनौतियों के बावजूद रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया था और इसमें 5 करोड़ नागरिकों की प्रतिक्रिया लेना एक बार फिर से ‘सम्पूर्ण स्वच्छता’ के लक्ष्य पर नागरिकों के जिम्मेदारी लेने का प्रमाण है। नागरिक अब उत्सुकता से इसके परिणामों का इंतजार कर रहे हैं, जिसकी मंत्रालय द्वारा जल्द ही घोषणा की जाएगी।

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